वित्तीय समावेशन पर जिले के बैंकर्स के लिए नाबार्ड की कार्याशाला का आयोजन


चित्तौड़गढ़। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के तहत वित्तीय समावेशन की पहचान 17 सतत विकास लक्ष्यों में से 7 के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में की गई है। वित्तीय समावेशन का अर्थ है कि व्यक्तियों और व्यवसायों के पास उपयोगी और किफायती वित्तीय उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच है जो उनकी जरूरतों को पूरा करते हैं। लेनदेन, भुगतान, बचत, क्रेडिट और बीमा। वस्तुतः यही कारण है कि श्वित्तीय समावेशनश के तहत सरकार, आरबीआई, नाबार्ड और बैंकों के द्वारा यह सुनिश्‍चित किया जा रहा है कि अंतिम छोर पर खड़े व्‍यक्‍ति को भी आर्थिक विकास के लाभों से जोड़ा जा सके। चित्तौड़गढ़ जिले के बैंक अधिकारियों के लिए आयोजित कार्यशाला के दौरान नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक महेंद्र डूडी ने यह बात कही। 

शहर की एक होटल में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य ज़िले के बैंकर्स को केंद्र सरकार के वित्तीय समावेशन निधि के अंतर्गत समर्थित ग्रामीण क्षेत्र की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देकर जिले में बैंकिंगए वित्तीय समावेशन और वित्तीय शाक्षरता को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम के दौरान विशिष्ठ अतिथि के तौर पर शिवराज जांगिड, उप निदेशक कृषि, चित्तौड़गढ़, अजय कुमार झा, क्षेत्रीय प्रबंधक, एसबीआई चित्तौडगढ़, पी वी सिंह अग्रणी बैंक जिला प्रबंधक और एस एन बैरवा डीआरएम, बीआरकेजीबी बैंक ने शिरकत की। उपस्थित मंचासीन अधिकारियों ने बैंकर्स से विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत जिले में लम्बी अवधि के मियादी ऋण को बढ़ावा देने का आवाहन किया ताकि देश में पूंजी निर्माण हो सके। इसके साथ हीए डीडीएम नाबार्ड ने केंद्र सरकार और नाबार्ड की कृषि एवं ग्रामीण विकास से सम्बद्ध योजनाओं जैसे कि कृषि अवसंरचना कोष, एआईएफ, प्रधानमंत्री मंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिककरण योजना, कृषि विपणन अवसंरचना इत्यादि योजनाओं की जानकारी दी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ