दिवाकर जयंती महोत्सव : शोभायात्रा एवं गुणानुवाद सभा का आयोजन


चित्तौड़गढ़। श्रमण संघीय उप प्रवर्तिनी वीरकान्ता म.सा. के सानिध्य में जगद वल्लभ जैन दिवाकर गुरुदेव चौथमल म.सा. की 145वीं जन्म जयंती हर्षोल्लास एवं समारोहपूर्वक मनाई गई।
जानकारी देते हुए संघ मंत्री दिलीप जैन ने बताया कि प्रातः 8ः15 बजे एक भव्य शोभायात्रा शांतिभवन से पंचवटी होती हुई अरिहंत भवन से मुख्य मार्ग होती हुई वापस शांति भवन में पहुँच कर गुणानुवाद सभा में परिवर्तित हुई। बग्गी में दिवाकर म.सा. का आदमकद आकर्षक चित्र लगा हुआ था। बैण्डबाजों की सुमधुर स्वर लहरियों के साथ श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाएँ दिवाकर जी के गुणगान एवं स्तवन गाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा में नगर के सभी उपनगरों से पुरुष श्वेत एवं महिलाएं केसरिया-पीत वस्त्रों में सुसज्जित गगनभेदी नारों के साथ पंक्तिबद्ध अनुशासित चल रहे थे। गुणानुवाद सभा मधुर व्याख्यानी साध्वी डाॅ. अर्पिता ने जैन दिवाकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज विज्ञान और भौतिकता के युग में अशांति, तनाव, हिंसा, मारामारी, छलकपट और आराजकता की भयावह स्थिति में आध्यात्मिक ज्ञान ही एक मात्र रामबाण उपाय है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई सन्देह नहीं है कि विज्ञान ने अपार सम्भावनाओं के द्वार खोले हैं। आज का मानव आकाश में पक्षियों की मानिन्द उड़ रहा है, समुद्र में मछलियों के मानिन्द तैर रहा है और धरातल पर पशुओं की भाँति दौड़ रहा है। महावीर रामकृष्ण और बुद्ध के इस धर्मप्रधान देश में मांसाहार और अभक्ष्य आहार बढ़ता जा रहा है, शाकाहार का प्रचलन कम हो रहा है। दुव्र्यसनों एवं फेशन की अंधी होड़ में युवा चकाचैंध हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जैन दिवाकर चौथमल महाराज जैसे अवतारी महामानव ही प्रकाश स्तम्भ रूप है जो भूले भटकों को राह दिखा सकते हैं। जैन दिवाकर गुरुदेव और जिनवाणी का प्रचार प्रसार उनका मिशन था। वे ज्ञान ज्योति एवं बहु आयामी दिव्य व्यक्तित्व के धनी अप्रतिम संत थे। 
उनकी वाणी में ओज एवं माधुर्य भाषा में प्रांजल्य आगमों तथा सभी धर्मग्रन्थों, वेद, पुराण, गीता, कुरान, का तल स्पर्शी अध्ययन, सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, उनके सरल एवं मर्मस्पर्शी प्रवचनों ने जाति, वर्ण, समाज का कोई भेद नहीं था। प्रवचनों में सभी धर्मों की शिक्षाओं का सार, उने द्वारा रचित सैंकड़ों गद्य, पद्य, गीत, लावणिया, ख्याल, आरतियां, जनजीवन का मार्गप्रशस्त कर रहे हैं। उनके द्वारा रचित निग्रन्थ प्रवचन भाषय को जैन गीता कहा जाता है। सभी आगमों के सार इस ग्रन्थ का गुजराती, मराठी, अंग्रेजी आदि भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उन्होंने कहा कि दिवाकर का प्रवचन प्रवाह महलों से झोंपड़ियों तक, ग्रामों से शहरों तक, जंगल से खेत खलिहान तक राजा महाराजाओं से लेकर निर्धन, किसान, आदिवासी तक सभी धर्म विलम्बियों के मध्य 55 वर्षों तक प्रवाह मान रहा। गांव गांव, डगर डगर, महावीर दर्शन का प्रचार प्रसार किया। उनकी जन्म जयंती के अवसर पर आओ हम अपने मनो मालिन्य वैर भाव व दुर्गुणों को उनके श्री चरणों में समर्पित करें। संघ निष्ठ, समाजनिष्ठ और राष्ट्र निष्ठ होकर अहिंसा करूणा और भाईचारें को अपने जीवन में उतारे यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि और जयन्ती मनाने की सार्थकता है।
सांसद ने कहा कि जैन दर्शन विशेषकर अपरिग्रह को समग्ररूप से जीवन में उतारने का आह्वान किया। सभा का संचालन करते हुए संघ संरक्षक ऋषभ सुराणा ने जैन दिवाकर के विलक्षण व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
श्री महावीर जैन मण्डल के अध्यक्ष डाॅ. आई.एम.सेठिया ने भी दिवाकर गुरू के प्रति भक्ति भाव प्रकट करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का मंतव्य प्रकट यिका। गुणानुवाद सभा में हस्तीमल चण्डालिया, पवन पटवारी, प्रो. छोटूलाल सुराणा, मदनलाल भड़कत्या, मदनलाल मेहता, महिला मंडल अध्यक्ष सरोज नाहर, संगीता चीपड़, लक्ष्मीबाई, परमा पारिया ने विचार व्यत किया। दिवाकर महिला मंडल दिवाकर महिला परिषद चन्दन बाला महिला मण्डल, शम्भूपुरा महिला मण्डल की बहनों ने सुन्दर गीतिकाएं प्रस्तुत की। आभार संघ अध्यक्ष लक्ष्मीलाल चण्डालिया ने किया। कार्यक्रम उपरान्त संघ की ओर से गौतम प्रसादी का आयोजन किया गया। इससे पूर्व पूरे देश में एक साथ जैन दिवाकर गुरुदेव ज्यार्तिमान थे स्तवन का समावेत स्वर से गान किया गया।

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