शुक्रवार को चांद दिखाई दिया। ईद उल-फितर को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के दसवें महीने शव्वाल के पहले दिन इसे मनाया जाता है। ईद के त्योहार के साथ ही रोजे और इबादत का महीना समाप्त हो जाता है। बता दें कि मुसलमानों का यह त्योहार भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन लोग शांति और सुख-समृद्धि के लिए दुआएं मांगते हैं। दुनिया भर में ईद के इस त्योहार को हर्ष-उल्लास के साथ मनाया जाता है। ईद की तारीख हिजरी कैलेंडर के कारण साल-दर-साल बदलती रहती है। यह कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है। इसमें चांद की घटती-बढ़ती चाल के अनुसार दिनों की गिनती की जाती है।
चित्तौड़गढ़ में ईद उल फितर की नमाज़
चित्तौड़गढ़ शहर में गम्भीरी नदी के पास स्थित स्थित ईदगाह में सुबह 8.30 बजे नमाज़ अदा की जाएगी। गोल प्याऊ स्थित काजी चल फिर शाह दरगाह में सुबह 8.45 बजे ईद उल फितर की नमाज अदा की जाएगी।
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