निंबाहेड़ा। आचार्य वीरेन्द्र कृष्ण दौर्गादत्ती ने जिज्ञासुओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि साधुओं के लिए आदेश का ज्ञान, श्रोता की भक्ति तथा प्रभु द्वारा प्रदत्त वैराग्य त्रिवेणी संगम है। जिससे तीर्थों का उद्गम होता है। आचार्य वीरेन्द्रकृष्ण सप्तदश कल्याण कल्याण महाकुंभ के अन्तर्गत सुमंतु कथा मंडप में व्यासपीठ से भविष्य पुराण की कथा का अमृतपान करा रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान को जिस भाव से भजा जाता है उसी प्रकार हमें वे प्राप्त होते है। आपके पास सामर्थ्य है, परंतु स्वामित्व नहीं है। त्याग की शक्ति होने पर ही स्वामित्व आता है।
केवल रक्षा करने पर आप मात्र चौकीदार ही है। इसलिए भगवान की भक्ति पूरे भाव से करनी चाहिए। देवी भगवती के स्वरूप का वर्णन करते आचार्य ने बताया कि भगवती का मुख भगवान शंकर, भुजाएं भगवान विष्णु, नैत्र अग्नि व केश यमराज, स्तन चन्द्रमा, नितम्ब पृथ्वी इन सभी के तेज से भगवती स्वरूप का निर्माण हुआ है। वहीं हिमालय सिंह रूप में एवं सभी देवी देवताओं की शक्तियों का संयुक्त स्वरूप भगवती जगदम्बा ने पुत्री के रूप में पर्वतराज के यहां जन्म लिया। जिस राजा के मंत्री व गुरू झूठ बोलते हो उस राज्य व राजा का विनाश अवश्यम्भावी है। ऐसा ही महिषासुर के साथ हुआ। जगदम्बा भगवती ने उसके आठ सेनापतियों का वध कर दिया। फिर उसने भैंसे, हाथी, सिंह रूप धरा। सभी रूपों में भगवती ने उसका वध कर दिया और अंत में उसके कंधे पर पैर रखकर त्रिशुल से उसका वध कर दिया। शुम्भ व निशुम्भ के वध का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि जब नाश मनुष्य पर छा जाता है, तो पहले विवेक मर जाता है। आचार्य ने भगवती के विभिन्न स्वरूप की व्याख्या की। वेद व्यास जी के अनुसार शताक्षी देवी को हजारों आंखों वाली देवी बताया गया है। गुजरात के कच्छ में आशापुरा व शाकम्भरी माता देवी के रूप में पूजी जाती है। सभी देवी देवताओं का पूजन वीर मॉ भगवती का पूजन है। मॉ भगवती सभी देवी देवताओं के तेज का सम्मिलित स्वरूप है। देवी स्वरूप की अष्टमी, नवमी व चतुर्दशी पूजा व्रत करने से शुभ फल प्राप्त होता है। प्रारंभ में आचार्य दौर्गादत्ती ने कल्याण नगरी के राजाधिराज ठाकुरजी के दर्शन कर मंच पर मुख्य यजमान के रूप में उनकी पूजा अर्चना की। वहीं वेदपीठ के न्यासियों द्वारा व्यासपीठ का पूजन किया गया।
सैकड़ों दीप ज्योति से हुई ठाकुरजी की महाआरती
कल्याण महाकुंभ के सप्तम दिवस संध्या वेला में सैकड़ों श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक रूप से असंख्य दीप ज्योति से अपने आराध्य की महाआरती की गई। इस दौरान नपाध्यक्ष सुभाष शारदा, पूरण आंजना, मनोहरलाल आंजना, नपा उपाध्यक्ष परवेज अहमद, माहेश्वरी समाज के प्रतिनिधियों, वेदपीठ के पदाधिकारियों एवं न्यासियों ने अपने आराध्य की महाआरती की।
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