पर से अलग होकर स्वयं में स्थित होने में ही जीवन का सुख और आनंद हैं- जय श्री जी म सा

चित्तौड़गढ़।  श्रमण संघीय साध्वी जय श्रीजी म सा ने खातर महल में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार में हर व्यक्ति सुख शांति चाहता है, कोई भी व्यक्ति दुख नहीं चाहता है। भोगों की कामना सुख के लिए उत्पन्न होती है ।जब जीव को सुख चाहिए, अमुक वस्तु ,परिस्थिति में सुख है यह ज्ञात होने पर उससे संबंधित कामना उत्पन्न होती है, कामना पूर्ति के लिए व्यक्ति पर से जुड़ता है और जैसे ही वो पर से जुड़ता है वैसे ही वह स्वयं से अलग हो जाता है।
स्वयं से अलग होने के साथ ही निज सुख, शांति और आनंद से भी अलग हो जाता है। यही संसार है, सुख प्राप्ति के लिए पर से जुड़ने का क्रम अनेकानेक जन्मों में भी पूरा नहीं हो पाता है।
जब साधक पर से अलग होकर स्वयं में स्थित होता है तो उसे आंशिक रूप से निज सुख निज आनंद की अनुभूति होती है ।जिस सुख की प्राप्ति के लिए भोगों की कामना करता है, वही सुख या उससे  कई गुना अधिक सुख उसे अपने आप में प्राप्त हो सकता है।
श्री संघ प्रचार प्रसार मंत्री सुधीर जैन ने विज्ञप्ति में बताया कि धर्म सभा को राजश्री जी म सा ने भी संबोधित किया। साध्वी समीक्षा श्री जी म सा भी विराजित रही।
प्रवचन के पश्चात चार दिवसीय बाल संस्कार शिविर का समापन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया ।
  संचालन  मंत्री अजीत नाहर ने किया।श्री संघ अध्यक्ष हस्तीमल चोरड़िया ने बताया कि जय श्री जी म सा का आगामी चातुर्मास निंबाहेड़ा नगर में होगा। चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश 9 जुलाई को होगा।
शिविर के अंतिम दिन समापन समारोह में बच्चों द्वारा शिविर में की गई  विभिन्न गतिविधियों पर बच्चों ने प्रस्तुतियां दी और बच्चों द्वारा नाटिका, कविता पाठ प्रस्तुत किए गए। महिला परिषद की हेमा बोहरा द्वारा शिविर मे बहनों द्वारा सिखाए गए विभिन्न कार्यक्रमों का विवरण दिया गया। शिविर में बालिकाओं को प्रशिक्षक सोनिका चोरड़िया द्वारा आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए और गुड टच बेड टच की बारीकी से जानकारी देकर जागृत किया गया।
बाद में श्री जैन दिवाकर महिला परिषद की बहनों और संघ के पदाधिकारियों द्वारा शिविर में भाग लेने वाले 70 बच्चों को पुरस्कार दिए गए। जय श्री जी म सा को  श्रमण संघ के अध्यक्ष हस्तीमल चोरड़िया और समस्त पदाधिकारियों द्वारा, श्री जैन दिवाकर महिला परिषद, चंदनबाला महिला मंडल, सेन्थी जैन महिला मंडल और जैन कांफ्रेंस के राष्ट्रीय और प्रांतीय पदाधिकारियों द्वारा "आदर की चादर" समर्पित की गई।
ओजस्वी वक्ता दिवाकर ज्योति वाणी भूषण राजस्थान वीरांगना परम पूज्य जय श्रीजी म सा मेवाड़ की माटी में 10 वर्षों के बाद पधारे। चित्तौड़ की जन्मभूमि में 10 वर्षों के बाद उनका पदार्पण हुआ। साथ ही आप श्री को जावरा श्री संघ बेंगलुरु से जिसमें वाणी भूषण, राजस्थान वीरांगना जैसी उपाधियों से अलंकृत किया गया इससे पूरे संघ में एक खुशी की लहर छा गई।

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